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भारत और न्यूजीलैंड में एक ही दिन लॉकडाउन लगा, लेकिन वहां कोरोना खत्म होने पर; 15 दिनों से वहां रोज 20 से भी कम मरीज आ रहे

भारत और न्यूजीलैंड दो देश। दोनों के बीच करीब 12 हजार किमी की दूरी। दोनों की आबादी में भी जमीन-आसमान का अंतर। एक तरफ भारत की आबादी 135 करोड़। दूसरी तरफ न्यूजीलैंड की आबादी करीब 50 लाख।भारत और न्यूजीलैंड दोनों ही देशों में कोरोना को फैलने से रोकने के लिए एक ही दिन लॉकडाउन लगाया गया। भारत में 25 मार्च से ही लॉकडाउन लागू है, तो वहीं न्यूजीलैंड में भी इसी दिन दोपहर 12 बजे से।
दोनों ही देशों में लॉकडाउन लगे एक महीने हो चुके हैं। इस एक महीने में एक तरफ न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न ने दो दिन पहले कहा था किउनका देश कोरोनावायरस से लड़ाई जीत गया है। उनका कहना था कि हम इकोनॉमी खोल रहे हैं, लेकिन लोगों की सोशल लाइफ नहीं।दूसरी तरफ, भारत में 3 मई के बाद भी हॉटस्पॉट वाले इलाकों में लॉकडाउन बढ़ाने की तैयारी हो रही है। अभी देश में 170 से ज्यादा इलाके हॉटस्पॉट हैं।

हालांकि, कोरोना से लड़ने में न्यूजीलैंड को अपनी कम आबादी और ज्योग्राफी का भी फायदा मिला। पिछले 15 दिन से वहां रोज 20 से कम ही मरीज आ रहे हैं। 28 अप्रैल तक वहां 1472 केस आ चुके हैं, जिसमें से अब सिर्फ 239 केस ही एक्टिव हैं,जबकि19 लोगों की मौत हुई है।

फरवरी में ही चीन से आने वाले यात्रियों की एंट्री पर रोक
न्यूजीलैंड में कोरोना का पहला मरीज 28 फरवरी को मिला था। लेकिन, उससे पहले से ही सरकार ने इससे निपटने की तैयारियां शुरू कर दीं।3 फरवरी से ही सरकार ने चीन से न्यूजीलैंड आने वाले यात्रियों की एंट्री पर रोक लगा दी थी। हालांकि, इससे न्यूजीलैंड के नागरिकों और यहां के परमानेंट रेसिडेंट को छूट थी। इसके अलावा, जो लोग चीन से निकलने के बाद किसी दूसरे देश में 14 दिन बिताकर आए, उन्हें ही न्यूजीलैंड में आने की इजाजत थी।
इसके बाद 5 फरवरी को ही न्यूजीलैंड ने चीन के वुहान में फंसे अपने यात्रियों को चार्टर्ड फ्लाइट से देश लेकर आ गई। इनमें 35 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक भी थे। इन सभी लोगों को आर्मी के बनाए क्वारैंटाइन सेंटर में 14 दिन रखा गया।इसके अलावा, न्यूजीलैंड में 20 मार्च से ही विदेशी नागरिकों की एंट्री पर रोक लगा दी थी, जबकिभारत में 25 मार्च से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद हुईं।

ये तस्वीर न्यूजीलैंड के ऑकलैंड शहर की है। सोमवार से ही यहां पर लॉकडाउन में थोड़ी ढील देकर लेवल-3 लागू किया गया है।

4-लेवल अलर्ट सिस्टम बनाया, बहुत पहले ही लॉकडाउन लगाया
23 मार्च को न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न ने देश को संबोधित किया। उन्होंने कहा, ‘हमारे देश में अभी कोरोना के 102 मामले हैं। लेकिन, इतने ही मामले कभी इटली में भी थे।' ये कहने का मकसद एक ही था कि अभी नहीं संभले तो बहुत देर हो जाएगी।’वहां की सरकार ने कोरोना से निपटने के लिए 4-लेवल अलर्ट सिस्टम बनाया। इसमें जितना ज्यादा लेवल, उतनी ज्यादा सख्ती, उतना ज्यादा खतरा।
21 मार्च को जब सरकार ने इस अलर्ट सिस्टम को इंट्रोड्यूस किया, तब वहां लेवल-2 रखा गया था। उसके बाद 23 मार्च की शाम को लेवल-3 और 25 मार्च की दोपहर को लेवल-4 यानी लॉकडाउन लगाया गया। सोमवार से वहां लेवल-4 से लेवल-3 लागू कर दिया गया है। 25 मार्च से लेकर अभी तक दोनों ही देशों में लॉकडाउन है। न्यूजीलैंड में जब लॉकडाउन लगा तब वहां कोरोना के 205 मरीज थे और भारत में जब लॉकडाउन लगा, तब यहां 571 मरीज थे।

कोरोना पॉजिटिव मरीजों की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की
न्यूजीलैंड में अगर कोई व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव मिलता, तो वहां की सरकार 48 घंटे के अंदर उसकी कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग भी करती है। यानी, किसी व्यक्ति के कोरोना पॉजिटिव मिलने पर उसके सभी करीबी रिश्तेदारों-दोस्तों को कॉल किया जाता था और उन्हें अलर्ट किया जाता था।ऐसा इसलिए ताकि लोग खुद ही टेस्ट करवा लें या सेल्फ-क्वारैंटाइन में चले जाएं।

ये तस्वीर न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च शहर की है। यहां महीनेभर बाद मंगलवार को फिर कंस्ट्रक्शन साइट पर मजदूर दिखाई दिए।

लॉकडाउन तोड़ने वालों पर सख्ती, तुरंत एक्शन
25 मार्च को लॉकडाउन लागू होने के बाद भी कुछ लोग घरों से बाहर निकल रहे थे। इनमें ज्यादातर यंगस्टर्स थे। इस पर प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डन ने समझाइश दी कि देश में कोरोना के ज्यादातर मामले 20 से 29 साल के लोगों में आ रहे हैं। अगर आप घर से बाहर निकलेंगे तो आपको कोरोना होने के चांस ज्यादा हैं।

31 मार्च कोरेमंड गैरी कूम्ब्स नाम का व्यक्ति लोगों पर थूक रहा था। उसने इसका वीडियो बनाकर फेसबुक पर शेयर भी किया। उसके बाद 4 अप्रैल को भी वह ऐसा ही कर रहा था। अगले ही दिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। और उसके अगले दिन कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया। हालांकि, बाद में उसे जमानत मिल गई। कूम्ब्स की सजा पर 19 मई को फैसला होना है।
न्यूजीलैंड पुलिस के मुताबिक, 28 अप्रैल तक 5 हजार 857 लोगों ने लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन किया। इनमें से 629 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। जबकि, 5 हजार 41 लोगों को वॉर्निंग देकर छोड़ दिया गया।



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